तपस्या की अग्नि में जलकर कर्म स्वाहा हो जाते हैं…साध्वीश्री पुण्य शीला…

 

 

पेटलावद से हरिश राठौड़ की रिपोर्ट :- पेटलावद ।श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ पेटलावद में पुण्य पुंज पुण्य शीला जी की निश्रा में 34 दिवसीय धर्म चक्र की आराधना दो तपस्वीयों श्रीमती अनीता नरेंद्र मोदी एवं श्रीमती मोना नवीन मुरार ने पूरी की उनकी तपस्या का श्री संघ द्वारा बहुमान किया गया श्रीमती अनीता का बहुमान श्रीमती अंजलि ऋषभ कटकानी ने तो श्रीमती मोना का बहुमान श्रीमती शालू अंकित मुरार ने धर्म चक्र (एकासने से)की बोली लेकर किया। धर्म चक्र में एक दो तीन चार पांच उपवास करके बढ़ना होता है उसके बाद फिर घटते क्रम में चार तीन दो एक उपवास करके पारणा किया जाता है यह तपस्या कुल चौंतीस दिन चलती है। इसके अलावा आज रोहित कटकानी ने चौबीस कल्पना सोलंकी श्रीमती मधु कटारिया ने बारह संजय मोदी ने सात श्रीमती अंजलि कटकानी ने पांच वर्धमान मुरार ने तीन उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए।
साध्वी श्री पुण्य शीला जी ने इस अवसर पर कहा शरीर को कितना ही मजबूत बनाओ इसका नाश अवश्य होता है यह शरीर हमें तप करने के लिए मिला है तप की अग्नि में कर्म स्वाह हो जाते हैं काया की माया (संपत्ति) तो आत्मा है और आत्मा तपस्या से मजबूत बनती है ,आराधना साधना का आधार शरीर है इसे खा पीकर मजबूत बनाने की जगह तपस्या कर कर्म निर्जरा कर आत्मा को मजबूत बनाने में लगायें, मजबूत बंगले के लिए नींव मजबूत रखना पड़ती है वैसे ही मनुष्य को आत्मा को मजबूत करने के लिए तप आराधना करना पड़ती है।
साध्वी चतुरगुणा जी ने कहा जिन शासन में पतित से पतित आत्मा अपना जीवन सार्थक कर सकती जो जीन शासन में श्रद्धा और विश्वास करता है उसका बेड़ा पार हो जाता है ।

 

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