दलालो और जादुगरो की गिद्ध निगाह से एक परिवार पर रोजी रोटी का संकट पेटलावद परिषद मे खरीदी से लेकर नामांतरंन के लिये एक पूरा गिरोह काम करता है,

नरेंद्र रामपाल व उसके परिवार पर रोजी रोटी का संकट… जी हाँ बस स्टैंड पर स्थित नगर परिषद का नवीन निर्माण कंप्लेक्स शुरु से ही विवादित रहा है, पूर्व मे यहाँ दुकान क्रमांक 03 मे विगत 30 वर्षों से अपनी रोजी रोटी चला रहा शुरू से आज तक खुद ही परिषद मे किराया भरता आया है, 2012 मे भाई की मृत्यू हो चुकी थी, भाभी और उसका बच्चा यहाँ से जा चुके थे, पर अब भाभी और उसके बेटे ने उक्त दुकान पर अपना हक़ जता दिया चूँकि दुकान आज भी भाई के नाम पर परिषद मे चल रही थी l विगत वर्षों में नरेंद्र ने कई बार नामांतरंन हेतु आवेदन दिया, जन सुनवाई मे भी आवेदन दिया परंतु जिम्मेदारो द्वारा नामांतरन नहीं किया l आज नई दुकान का निर्माण होते ही यहाँ पर एक दुकान की नीलामी हुई जो लगभग 55 लाख रुपये मे गई l बस यही लालच नरेंद्र की भाभी मे आ गया l दुकान पर गिद्ध जैसी नजर गड़ाये बैठे दलाल, पूंजी पतियों ने अपना रंग दिखाकर भाभी और उसके बेटे से परिषद से दुकान मिलने से पहले ही सौदा 45 लाख मे जमा लिया , अब सोचो पेटलावद के जादुगरो की जादूगिरि से आज नरेंद्र के परिवार के रोजीरोटी के लाले पढ़ गये हैं l नरेंद्र और उसकी पत्नि का कहना है की जो भी हमारी दुकान को खरीदेगा वही हमारी बर्बादी का जवाबदार रहेगा l उन्होंने सारी रसीदे बताकर सी एम ओ से माँग की है की उक्त दुकान पर हमारा कब्जा था और हम ही किराया भरते आये है और वर्तमान मे भी दुकान निर्माण से पूर्व अनुबंध पर भी मेरे ही हस्ताक्षर थे और एक लाख रुपये भी मेने ही भरे थे अतः उक्त दुकान हमे ही प्रदान करे l

 

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