हरिहर आश्रम में 11लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण का महाअभियान, मंगलवार को सावन माह की महाशिवरात्रि पर बने एक लाख से अधिक पार्थिव शिवलिंग, निर्माण की संख्या सात लाख पार।……

पेटलावद से हरिश राठौड़ की रिपोर्ट:-
पेटलावद। सभी देवीदेवताओं की साकार रूप में पूजा की जाती है, लेकिन एक शिव ही है जिनकी साकार ओर निराकार दोनों रूप में पूजा की जाती है। यह बात रायपुरिया राजगढ़ रोड़ पर स्थित हरिहर आश्रम, श्रीकृष्ण कामधेनु गौशाला में 11लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण के महारुद्राभिषेक के दौरान पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. देवेंद्र शास्त्री ने कही।

उन्होंने कहा कि पवित्र सावन का महीना 14 जुलाई से शुरू हो गया। सावन के महीने मे भगवान शंकर की पूजा अर्चना करने का विशेष महत्त्व होता हैं। वैसे तो शिवरात्रि हर महीने आती हैं परन्तु सावन माह की शिवरात्रि का विशेष महत्त्व होता हैं। इस दिन शिव जी का अभिषेक पूजा अर्चना की जाती हैं। जिले का आध्यात्मिक ओर धार्मिक केंद्र बन चुके हरिहर आश्रम बनी के संस्थापक यज्ञाचार्य पंडित देवेंद्र शास्त्री हर वर्ष पूरे सावन माह में विशेष पार्थिव शिवलिंग के निर्माण का आयोजन रखते हैं। इस वर्ष भी सावन माह में महाशिवरात्रि पर पर्तिव शिवलिंग का निर्माण और उनका रुद्राभिषेक का अनुष्ठान करवाया जा रहा है। इस दिन घर पर पार्थिव शिवलिंग बना कर उसका अभिषेक , पूजा , अर्चना अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए किया जारहा है। पूरे अंचल में घर घर पर सावन की महाशिवरात्रि को पार्थिव शिवलिंग बनाकर उनका अभिषेक कर विसर्जन किया गया।
श्री शास्त्री ने श्रद्धालुआ को पार्थिव शिवलिंग की महत्ता के बारे में बताया कि पर्तिव शिवलिंग महत्वमुख्य मिट्टी के शिवलिंग को कहा जाता है। कलयुग में मिट्टी के बने पार्थिव शिवलिंग के पूजन का विशेष महत्व है।।शिवलिंग की ऊंचाई 12 अंगुर से अधिक नहीं होनी चाहिए।

*एव शिव ही है जो साकार ओर निराकार है।*
पंडित श्री शास्त्री ने कहा कि सभी देवी देवताओं की साकार रूप की पूजा होती है। लेकिन भगवान शिव एकमात्र ऐसे देवता हैं जिनकी पूजा साकार और निराकार दोनों रूप में होती है। साकार रूप में भगवान शिव मनुष्य रूप में हांथ में त्रिशूल और डमरू लिए बाघ की छाल पहनें नंदी की सवारी करते हुए नजर आते हैं। शिवपुराण के अनुसार साकार औऱ निराकार दोनों रूपों में महादेव की पूजा फलदायी होती है।

*नाना प्रकार की शिवलिंग होते है।*
पंडित श्रीशास्त्री ने कहा कि पुण्य एव पवित सावन माह में शिवलिंग की पूजा करना अधिक उत्तम माना गया है। शिव पुराण में भगवान शिव की अराधना के लिए शिवलिंग का विशेष महत्व बताया गया है। शिवलिंग की अराधना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और दुखों का निवारण होता है। देवलिंग, असुरलिंग, अर्शलिंग, पुराण लिंग, मनुष्य लिंग, स्वयंभू लिंग कई प्रकार के शिवलिंग होते हैं तथा इनका अलग महत्व और प्रभाव होता है। लेकिन शिवपुराण के अनुसार पार्थिव शिवलिंग का विशेष महत्व है। ऐसे में आइए जानते हैं मिट्टी का शिवलिंग कैसे बनाएं और शिवपुराण में इसका क्या महत्व है।

*ऐसे बनाए जा रहे मिट्टी के पार्थिव शिवलिंग*

उन्होंने कहा कि मिट्टी के शिवलिंग को पार्थिव शिवलिंग कहा जाता है। मिट्टी का शिवलिंग गाय के गोबर, गुड़, मक्खन, भस्म, मिट्टी और गंगा जल मिलाकर बनाया जाता है। पार्थिव शिवलिंग बनाते समय इन सभी चीजों को एक में मिला दें और फिर गंगाजल मिलाकर बनाएं। ध्यान रहे मिट्टी का शिवलिंग बनाते समय पवित्र मिट्टी का इस्तेमाल करें। कोशिश करें की बेल के पेड़ की मिट्टी या फिर चिकनी मिट्टी का उपयोग किया गया है।

 

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