पुरात्तत्त्विक महत्व का 13 वी ईसवी सदी की शिल्पकलाओं , पौराणिक महत्व का, पत्थरो से बना, विशेष कलाकृति की नायाब तस्वीर है प्राचीन भूतेश्वर महादेव मंदिर…. उड़कर आया या ?,किसी ने बनाया ?पम्पावती के किनारे बने इस मंदिर के बारे में है कई कथाएं भी प्रचलित, विशेष लिपियो में उकेरी गई लेखनी आज भी बनी हुई है रॉज…. उचित देखभाल की दरकार बन सकता है क्षेत्र का बड़ा दार्शनिक स्थल…. सावन मास में बना भक्तो कि आस्था का केंद्र…

पेटलावद से मनोज पुरोहित / हरिश राठौड़ की रिपोर्ट

पेटलावद। शहर के पम्पावती तट पर स्थित पुरातत्वकालीन भूतेश्वर महादेव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है, जहां प्रतिदिन श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना के लिए जाते हैं।

*श्रावण मास में शिवालयों में बढ़ रही भीड़*

श्रावण माह शुरुआत हो चुकी है 25 जुलाई को श्रावण मास का दूसरा सोमवार है ऐसे में भूतेश्वर महादेव मंदिर पर भक्तों की भीड़ आए दिन के अलावा श्रावण माह में में भक्तो की तादात बड़ जाती है।वही आगामी दिनों में मनसा महादेव व्रत भी प्रारंभ होने वाले हैं, ऐसे में महिलाओ- पुरुषों सहित छोटे-छोटे बच्चे मंदिर पर बड़ी संख्या में पूजा अर्चना के लिए जाते हैं लेकिन बरसाती कीचड़ व मार्ग की सुव्यवस्थित व्यवस्था नहीं होने के चलते भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। शासन प्रशासन की अनदेखी का शिकार हुए मंदिर की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया, लेकिन बाद में सामाजिक संगठनों और मंदिर कार्यकर्ताओं ने इसके संरक्षण को लेकर कदम उठाए। आज मंदिर पर बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

*पुरात्तत्त्विक मन्दिर के रुप मे प्रख्यात*

शहर मेंवेसे तो कई शिव मंदिर है जो अपनि अलग पहचान रखते है । लेकिन भूतेश्वर महादेव मंदिर पुरात्तत्त्विक रूप से अपने आप मे नगर का एकमात्र मन्दिर है ऐतिहासिक धरोहर के स्थानो के रूप में जो अपने साथ कई अनसुलझी गुत्थिया ओर लोकोक्ति तथा लोक संस्कर्ति की अनूठी पहचान रखता है ओर जो कि पुरातात्विक महत्व के साथ लोंगों की धार्मिक आस्था का केन्द्र भी माना जाता है।

*13 वी सती ईसवी का इतिहास*

इस मंदिर की कलाकृतियों ओर बनावट अपने आप मे लोगो के लिये आकर्षण का केंद्र है।पत्थर से पत्थरो को एक दूसरे पर रखकर ऐसा बनाया मानों जैसे किसी उस जमाने का कोई शिल्पीकार हो। पुरातात्विक महत्व को अपने में समाए हे यह स्थान का इतिहास आयुक्त पुरात्तत्त्व अभिलेखागार ओर संग्रहालय विभाग भोपाल के अनुसार शैलीगत आधार पर परमारकालीन 13 वी शती ईसवी की वस्तु शिल्प का प्रतिनिधित्व करती है।
इस तरह से यह मंदिर बिना किसी जुडायी के केवल पत्थर रखकर बनाया गया है।

*पुरातन लिपि में लिखी और उकेरी शिल्पकारी*

इस मंदिर के पत्थरों पर किसी अज्ञात लिपी मे कुछ लिखा हुआ भी है। जिसे आज तक पढा नही जा सकता। यदि पुरातात्विक विभाग की मदद से प्रशासन प्रयास करें तो शायद इस
मंदिर के इतिहास से सबंधित कई जानकारीयों से पर्दा हट सकता है। मंदिर के पीछे कई प्रकार कि किवंदतियां प्रचलित है। कोई कहता है इसे एक साधु ने यही पर बनाया था तो कोई इसे यति द्वारा बनाकर उडाकर यंहा लाकर स्थापित की गई थी।

*देखभाल कि जरूरत*

हालांकि नदी के किनारे बसे हुए इस मंदिर पर पहुंचने में आम जनता को दिक्कतों का सामना रोड नहीं होने के कारण करना पड़ रहा है । भक्तों का मानना है कि यदि इस मंदिर पर शासन प्रशासन और आम जनता सहयोग करे ओर यदि ठीक ढंग से देखरेख और मरम्मत करें ,वही लाइटिंग, पुनर्निर्माण, सोंदरीकरण और निर्माण आदि के माध्यम से यह मंदिर एक पिकनिक स्पॉट के रूप ओर बड़े दार्शनिक स्थल के रूप में भी स्थापित हो सकता है।

*महाआरती ओर प्रसादी का हो रहा आयोजन*

लेकिन जब से पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा घरों घर श्रवण होने लगी है, उसके बाद से पुरातात्विक महत्व के इस मंदिर पर भी श्रद्धालुओं का संख्या लगातार दर्शन करने के लिए बढ़ती जा रही है ।मंदिर पर प्रत्येक सोमवार को विशेष आरती, पूजन ,अर्चन और महाअभिषेक भक्तों के द्वारा लगातार किया जा रहा है भक्तों के द्वारा प्रत्येक सोमवार को इस मंदिर में महाआरती और शाम को 7:00 बजे उतारकर महाप्रसादी का वितरण भी किया जा रहा है बाबा के भक्तों द्वारा नगर की जनता से अधिक से अधिक धर्म लाभ लेने की भी अपील की गई है।इस तरह से इन दिनों पुरातात्विक महत्व का यह मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र बना हुआ है।

 

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