नापंचमी पर कालसर्प दोष निवारण महायज्ञ का होगा आयोजन…. पण्डित देवेंद्र शास्त्री के सानिध्य में हरिहर आश्रम में होगा निःशुल्क अनुष्ठान….

पेटलावद से हरिश राठौड़ की रिपोर्ट:- पेटलावद। महर्षि पाणिनि संस्कृत व वैदिक विद्यापीठ के मार्गदर्शन में रायपुरिया राजगढ़ रोड पर स्थित हरिहर आश्रम बनी में जरूरतमंद लोगों के लिए कालसर्प दोष शांति निवारण महायज्ञ दो अगस्त नागपंचमी के अवसर पर निशुल्क किया जा रहा है। यह महायज्ञ हरिहर आश्रम में चल रहे 11लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण महोत्सव के अंतर्गत आश्रम के पीठाधीश्वर पं. डा. देवेंद्र शास्त्री के सानिध्य में आयोजित किया जाएगा।

अंचल के सभी श्रद्धालु जिनकी जन्मकुण्डली में कालसर्प दोष योग हैं वे इस अनुष्ठान में निःशुल्क भाग ले सकते हैं।अनुष्ठान में भाग लेने के लिए 31 जुलाई तक पंजीयन कराना आवश्यक है।
महायज्ञ आयोजन महत्व पर चर्चा करते हुए पीठाधीश्वर पंडित श्रीशास्त्री ने बुधवार को कहा कि कालसर्प दोष को लेकर कुछ अज्ञानी लोगों भ्रमित कर लोगों में भय पैदा करके आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे है। उनके दोष निवारण के लिए नागपंचमी को यह आयोजन किया जा रहा है।

*दोष निवारण के लिए गौशाला की भूमि महत्वपूर्ण*

श्री शास्त्री ने बताया कि वास्तविक तौर पर भारत की समस्त भूमि भगवान, तपस्वियों की होने से कालसर्प दोष पूजन के लिए स्थान का महत्व नहीं है। परंतु कालसर्प दोष निवारण के मुख्य स्थानों में त्रयम्बकेश्वर – नासिक, महाकाल उज्जैन, श्रीकाल हस्ती आंध्रप्रदेश प्रमुख हैं। शास्त्रों में कालसर्प दोष निवारण हेतु गौशाला भूमि का विशेष महत्व बताया गया है।

*काल सर्पदोष का प्रभाव*

पंडित श्रीशास्त्री ने बताया कि जातक की कुंडली में कालसर्प दोष के प्रभाव से उसके जीवन में धन की कमी, व्यापार में बाधा, उन्नति में बाधा, परीक्षा का डर, अधिक पढाई करने पर भी कम अंक आना, शारीरिक कष्ट, गृह क्लेश, विवाह में बाधा इत्यादि परिस्थितीयां बनी रहती है। काल सर्प दोष मुख्य रूप से 12 प्रकार के होते है। उनके144 प्रकार के कालसर्प दोष 2016 प्रकार के अल्प प्रकार के दोष होते है। लेकिन वैदिक मंत्रों के साथ विधि विधान से पूजन यज्ञ से कालसर्प के दुष्प्रभाव का निवारण किया जाकर एश्वर्यमय जीवन जीया जा सकता है।

*दर्शन मात्र से दोष निवारण संभव*
आचार्य श्रीशास्त्री ने बताया कि भारत में केदारनाथ के पास त्रियुगी नारायण स्थान हैं। जहां के दर्शन कर लेने से ही जातक के कालसर्प दोष का निवारण हो जाता है। इसके पीछे शास्त्रानुसार उन्होंने इस स्थान पर भगवान शंकर पार्वती का विवाह होना उनके फेरे लिए जाने वाले यज्ञ कुंड की अग्नि आज भी प्रज्वलित रहने को कारण बताया।

 

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