तपस्या कर्म निर्जरा ओर आत्मशुद्धि का शशक्त माध्यम…साध्वीश्री मधुबालाजी….

पेटलावद से हरिश राठौड़ की रिपोर्ट

पेटलावद|तपस्या कर्म निर्जरा और आत्मशुद्धि का एक सशक्त माध्यम है।तपस्या के साथ स्वाध्याय, ध्यान ,जप,मौन, अनुप्रेक्षा आदि प्रयोग चलने से तपस्या का पूरा लाभ मिल सकता है ।साथ ही इन प्रयोगों के योग से तपस्या का महत्त्व भी बढ़ जाता है।

उक्त आशय की उदगार श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ
धर्मसंघ के 11वें अनुशास्ता युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या शासनश्री साध्वीश्री मधुबालाजी ने श्रीमती वंदना इंदरजी रुनवाल (थांदला )के 15 उपवास की तपस्या पर आयोजित अभिनन्दन समारोह में तेरापंथ भवन में श्रावक संघ श्रमिकों के समक्ष व्यक्त किए।
वन्दना रुनवाल ने साध्वीश्री से 16 उपवास के प्रत्याख्यान भी ग्रहण किए।
आज चतुर्दशी के अवसर पर साध्वीश्री ने हाजरी का वाचन करते हुए तेरापंथ धर्मसंघ की विभिन्न महत्वपूर्ण मर्यादाओं के बारे में अवगति प्रदान की।
आपने कहा कि तेरापंथ
धर्मसंघ की 5 मौलिक मर्यादाए है ।
सर्व साधु -साध्वियां एक आचार्य की आज्ञा में रहे। विहार- चतुर्मास आचार्य की आज्ञा से करें ।
अपने -अपने शिष्य -शिष्याएं ना बनाएं ।
आचार्य भी योग्य व्यक्ति को दीक्षित करें, दीक्षित करने पर भी कोई अयोग्य निकले तो उसे गण (धर्मसंघ) से अलग कर दे।
आचार्य अपने गुरुभाई या शिष्य को उत्तराधिकारी चुने उसे सब साधु -साध्वियाँ सहर्ष स्वीकार करें ।
इसके अलावा साध्वीश्री ने अन्य मर्यादाओं का वाचन किया।
इस अवसर पर साध्वीवृंद ने स्वरचित गीत के माध्यम से तपस्या की अनुमोदना की ।
साध्वीश्री सौभाग्यश्रीजी व साध्वीश्री मंजुलयशाजी ने तप अनुमोदना मे अपने भाव व्यक्त करते हुए श्रावक श्रविकाओं को तपस्या की प्रेरणा प्रदान की।

तेरापंथी सभा के अध्यक्ष मनोज गादिया, अमराबाई जैन (दुर्गापुर )ने तपअभिनंदन मे अपने भावो को अभिव्यक्ति दी।
शैली पटवा,नेहा भंडारी,इंदर रुनवाल ने तपस्या का संकल्प लेकर तपस्या का अभिनन्दन किया।
तेरापन्थ सभा की ओर से साहित्य व मोमेंटो भेंट कर तपस्वी का सम्मान किया गया।
चतुर्दशी होने से श्रावक निष्ठा पत्र का वाचन तेरापंथी सभा के अध्यक्ष मनोज गादिया ने किया जिसे समस्त श्रावक -श्रविकाओ ने सामूहिक रूप से दोहराया

 

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