रेलवे गेट चार साल से बंद, ग्रामीण जान जोखिम में डाल पार कर रहे…..

पेटलावद से हरिश राठौड़ की रिपोर्ट

झाबुआ/अमरगढ़. ग्राम अमरगढ में 4 साल से रेलवे क्रॉङ्क्षसग गेट बंद कर दिया गया है , जिससे दूसरी ओर स्थित गांव से सीधा सम्पर्क लगभग खत्म हो गया है । पटरी के दूसरी ओर लगभग 5 से 7 गांव है, ग्रामीणों को अमरगढ आने के लिए कई किमी घूम कर जाना पड रहा है। ग्रामवासी समय बचाने मजबूरी में जान जोखिम में डालकर रेल पटरी भी क्रॉस कर रहे हैं। यहां तक की वैकल्पिक मार्ग भी कीचड़ भरा होने से ग्रामीणों का सफर परेशानियों भरा है। ग्रामीणों की मांग है कि रेलवे द्वारा बंद किए गए क्रॉङ्क्षसग गेट को शुरू किया जाए। वैकल्पिक मार्ग भी ठीक किया जाए।

ऊबड़- खाबड़ और कीचड़ भरे मार्ग….

ग्राम अमरगढ के रेलवे स्टेशन के दूसरी ओर 5 से 7 गांव की बसाहट है, जिसमें ग्राम गुलबाखोरी , रत्नाली जैसे गांव में रहने वाले ग्रामीणों को अमरगढ़ आने के लिए एवं अमरगढ क्षेत्र के रहवासियों को मार्ग से आवाजाही करने के दौरान रेलवे पटरियां पार करना पड़ती है। रेलवे ने करीब 4 वर्षो से भी अधिक समय से यहां स्थित क्रॉङ्क्षसग गेट को बंद कर दिया गया है । वैकल्पिक तौर पर रेल पटरियों के नीचे बना हुआ एक नाला है ,वह भी असमतल है। बरसात के दिनों में यहां होने वाले कीचड़ में बैलगाडी ,टैक्ट्रर जैसे बडे वाहनों की निकासी भी संभव नहीं है । पैदल और दो पहिया वाहनों के लिए भी यह मार्ग दुविधा भरा है। वैसे तो 12 महीने इस मार्ग में पाइप लाइन लीकेज के कारण अकसर पानी भरा रहता है। ऐसे में उखड- खाबड और कीचड भरे मार्ग पर चलना भी दूभर है । बारिश के समय तो इस वैकल्पिक मार्ग बंद ही हो जाता है । यहां पढऩे वाले विद्यार्थी भी जान जोखिम में डालकर रेल पटरियां क्रॉस करके स्कूल पहुंचते हैं।

गेट खोलने की मांग….

ग्रामीण राधेश्याम शर्मा, देवीलाल बसेर, सत्यनारायण ङ्क्षसगाड,प्रवीण पाटीदार ने बताया कि रेलवे स्टेशन के दूसरी तरफ जाने में परेशानी होती है ,वाहनों को कई किलोमीटर लम्बा चक्कर लगाकर गुजरना पड़ता है । रेलवे के गेट को खोल दिया जाना चाहिए, जिसका लाभ हजारों ग्रामीणों को मिल सकेगा ।तत्कालिक रूप से रेलवे को नाले वाले मार्ग को दुरूस्तीकरण भी करना चाहिए, जिससे पैदल यात्री और छोटे वाहनों को आवागमन में आसानी मिल सकेगी ।

 

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